सोमवार, 6 अप्रैल 2015

satya ki khoj review on different websites

4 टिप्‍पणियां:

  1. बेहतरीन पुस्तक के लिए हमारी हार्दिक शुभकामनाएं प्रवीण भाई

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  2. प्रिय प्रवीण. पहले तो बधाई.
    पुस्तक तो अभी बांची नहीं किन्तु ये अवश्य लिख सकता हूँ कि लेखक के लिए पुस्तक, उसकी एक संतान की तरह होती है. इसके जन्म की प्रसव पीड़ा से तुम कितने गुजरे होगे, इसकी तो मैं कल्पना ही कर सकता हूँ. तुम बेहतर पाठक हुए, तभी इस पुस्तक के सृजक बन सके.
    मेरा मानना है कि जब वर्तमान पर विचारहीनता, मूल्यहीनता और भटकाव दमदारी से हावी है तब यह पुस्तक पाठक को चिंतनशील, विचारशील और कर्मशील बनाने में मददगार साबित होगी, मेरी यही मनोकामना है. पुनः शुभकामनायें.

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  3. आप सभी का आभार एवं सादर वंदन

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